2 हजार से अधिक के डिजिटल भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क का विरोध, कैट ने निर्णय वापस लेने की मांग की
बालाघाट। डिजिटल भुगतान व्यवस्था के तहत यूपीआई लेन-देन पर प्रस्तावित शुल्क को लेकर व्यापारियों में असंतोष बढ़ने लगा है। इसी क्रम में मंगलवार, 22 सितंबर को कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) की बालाघाट जिला इकाई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। इसमें 2 हजार रुपये से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क लगाए जाने के प्रस्ताव को लागू नहीं करने की मांग की गई।
व्यापारी प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकार की ओर से पिछले वर्षों में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए व्यापारियों और आम नागरिकों को लगातार प्रोत्साहित किया गया है। यूपीआई भुगतान आज छोटे-बड़े कारोबार में लेन-देन का सुविधाजनक माध्यम बन चुका है। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने से व्यापारियों के साथ-साथ ग्राहकों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
निर्णय पर पुनर्विचार की मांग
कैट पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार से यूपीआई लेन-देन पर एमडीआर शुल्क लगाए जाने संबंधी प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने और इसे वापस लेने की मांग की है। व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापारी वर्ग ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में शुल्क लगाने से छोटे कारोबारियों के सामने अतिरिक्त आर्थिक भार की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
छोटे कारोबारियों की बढ़ सकती है लागत
कैट जिला अध्यक्ष भवानीशंकर टेकड़ीवाल एवं यज्ञेश लालू चावड़ा ने बताया कि संगठन लंबे समय से व्यापारियों के बीच डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान और सेमिनार आयोजित करता रहा है। व्यापारियों को ऑनलाइन भुगतान स्वीकार करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। वर्तमान में बड़ी संख्या में छोटे दुकानदार और कारोबारी यूपीआई के माध्यम से भुगतान स्वीकार कर रहे हैं।
पदाधिकारियों के अनुसार यदि यूपीआई भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लागू किया जाता है तो इससे कारोबार की लागत बढ़ सकती है। छोटे व्यापारियों के लिए यह अतिरिक्त खर्च परेशानी का कारण बन सकता है। साथ ही, ग्राहकों द्वारा डिजिटल भुगतान के उपयोग पर भी इसका प्रभाव पड़ने की आशंका है।
शुल्क वापस नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन के माध्यम से व्यापारियों ने चेतावनी दी कि यदि प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था को वापस नहीं लिया गया तो संगठन आगे आंदोलन का रास्ता अपनाने पर विचार करेगा। पदाधिकारियों ने कहा कि शुल्क लागू होने की स्थिति में व्यापारी यूपीआई के माध्यम से होने वाले लेन-देन को सीमित करने के लिए मजबूर हो सकते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से व्यापारियों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था लागू नहीं करने और पूर्व व्यवस्था बनाए रखने की मांग की।