के.के. सिंगारे के फार्म हाउस में डेढ़ एकड़ पर लगे पेड़ों की आकलन में जुटी ईओडब्ल्यू
बालाघाट। ईओडब्ल्यू की कार्रवाई में आय से ज्यादा संपत्ति मामले में पकड़े गए, पीडब्ल्यूडी भवन शाखा के कार्यपालन यंत्री के.के. सिंगारे का शासन ने उनके मूल सहायक यंत्री के पद पर ग्वालियर के मुख्य अभियंता भवन लोक निर्माण विभाग कार्यालय में स्थानांतरित कर दिया है। शुक्रवार को उनका स्थानांतरण आदेश सामने आया है।
उल्लेखनीय है कि सिविल कांट्रेक्टर एसोसिएशन जनरल सेक्रेटरी यूनुस खान ने भ्रष्टाचार के आरोप में पकड़े गए प्रभारी कार्यपालन यंत्री के.के. सिंगारे को बालाघाट से हटाकर उन्हें उनके मूल पद पर भेजे जाने की मांग पीडब्ल्यूडी मंत्री से की थी। बताया जाता है कि इसके बाद ही शासन ने यह एक्शन लिया है।
3 सितंबर को ईओडब्ल्यू जबलपुर की टीम ने प्रभारी कार्यपालन यंत्री के.के. सिंगारे के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में कार्रवाई की थी। उस दौरान ईओडब्ल्यू को बालाघाट में उनके शासकीय निवास से ढाई लाख रुपए और 25 लाख रुपए कीमत का एक वाहन मिला था। जिसके बाद जब टीम ने उनके छिंदवाड़ा आवास, फार्म हाउस और खातों का पता किया तो कार्यपालन यंत्री के.के. सिंगारे, उनकी पत्नी और बेटों के नाम से करीब 11 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति मिली थी। जिसे ईओडब्ल्यू ने आय से 378 प्रतिशत ज्यादा संपत्ति मानते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया था। जिसके बाद सिविल कांट्रेक्टर एसोसिएशन ने मोर्चा खोलते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की थी।
वहीं ईओडब्ल्यू से भी उनकी जांच अभी पूरी नहीं हुई है। भविष्य में अनुपातहीन मिली संपत्ति से और ज्यादा संपत्ति होने की जानकारी सामने आ सकती है। चूंकि विभाग को उनके तीन लोन और करीब फार्म हाउस की 18 एकड़ जमीन में डेढ़ एकड़ जमीन में पेड़ के लगे होने की जानकारी मिली है।
जबलपुर ईओडब्ल्यू एसपी धामी ने बताया कि जांच में प्रभारी कार्यपालन यंत्री के.के. सिंगारे के फार्म हाउस की 18 एकड़ की जमीन पर डेढ़ एकड़ में लगे पेड़ों की जानकारी और उसकी लागत की जानकारी के लिए हमने डीएफओ को पत्र लिखा है। जिसके बाद पेड़ों की लागत और खर्च के बारे में जानकारी मिल पाएगी।
जानकारी अनुसार 28 अगस्त 1993 को सहायक यंत्री के पद से विभाग में पदस्थ हुए कमलकिशोर सिंगारे के 31 जुलाई 2026 तक की 33 साल की सेवा में उन्हें कुल वैधानिक आय एक करोड़ 97 लाख 59 हजार 580 रुपए की हुई, लेकिन इसके विरुद्ध उन्होंने इस अवधि में करीब व्यय 9 करोड़ 45 लाख 95 हजार 477 रुपए किया। जो उनकी वैधानिक आय से 378 प्रतिशत, 7 करोड़ 48 लाख 35 हजार 897 रुपए ज्यादा है, जिस पर ईओडब्ल्यू ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच की जा रही है। वहीं राहुल सिंह कार्यपालन यंत्री सिविल, जो कार्यालय कार्यपालन यंत्री भवन लोक निर्माण विभाग मुरैना में पदस्थ थे, उन्हें कार्यपालन यंत्री भवन लोक निर्माण विभाग बालाघाट में पदस्थ किया गया है।