किरनापुर के चार निलंबित पुलिसकर्मियों पर आपराधिक मामला दर्ज
बालाघाट। किरनापुर पुलिस थाने में चोरी के एक मामले की जांच के दौरान महिला से कथित अमानवीय व्यवहार और अवैधानिक तरीके से कार्रवाई किए जाने के मामले में एसआईटी की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस ने चार निलंबित पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है। मामले में एसआई दामेन्द्र तुरकर, प्रधान आरक्षक आशीष बघेल, आरक्षक कपिल बघेल और महिला आरक्षक मेघा टेकाम के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई है।
चोरी की जांच से शुरू हुआ पूरा मामला
मामला 21 अगस्त को किरनापुर पोस्ट ऑफिस के सामने हुई करीब 50 हजार रुपए की चोरी से जुड़ा है। इसी मामले की जांच के दौरान पुलिस ने 2 सितंबर को टिमकीटोला निवासी सावित्री चौधरी और उनके पति कैलाश चौधरी को पूछताछ के लिए थाने बुलाया था। महिला का आरोप है कि थाने में उसके साथ मारपीट और प्रताड़ना की गई। इसके बाद पुलिस ने उसे चोरी के मामले में आरोपी बनाकर 3 सितंबर को न्यायालय में पेश किया था।
एसआईटी को मिलीं पुलिस कार्रवाई में कई अनियमितताएं
पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा के निर्देश पर शिकायत की जांच के लिए डीएसपी प्रतिष्ठा राठौर के नेतृत्व में चार सदस्यीय एसआईटी गठित की गई थी। जांच के दौरान टीम ने महिला को थाने में बैठाए जाने, गिरफ्तारी की प्रक्रिया और पूछताछ के तरीके को लेकर कई अनियमितताएं दर्ज कीं।
एसआईटी के अनुसार, महिला को बिना पर्याप्त विधिक आधार के थाने में बैठाया गया। जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उपलब्ध साक्ष्यों की स्थिति में महिला की गिरफ्तारी की प्रक्रिया में आवश्यक कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। रिपोर्ट में महिला और उसके पति को थाने में रोके रखने, डराने-धमकाने तथा अनुचित दबाव डालकर पूछताछ किए जाने की बात भी सामने आई है।
इकबालिया बयान के आधार पर कार्रवाई का आरोप
जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि पुलिस ने पर्याप्त परिस्थितिजन्य साक्ष्य जुटाए बिना महिला के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। रिपोर्ट के मुताबिक, कार्रवाई में उसके देवर के कथित इकबालिया बयान को आधार बनाया गया। एसआईटी ने पुलिस प्रक्रिया के इस पहलू को भी जांच के दायरे में लिया।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
एसआईटी की जांच के बाद चारों पुलिसकर्मियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 127, 115(2), 296(बी), 351(1) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने प्रकरण की आगे की जांच शुरू कर दी है।
महिला के मीडिया के सामने आने के बाद मामला फिर चर्चा में
एसआईटी रिपोर्ट सामने आने से एक दिन पहले सावित्री चौधरी अपने पति कैलाश चौधरी के साथ मीडिया के सामने आई थीं। उन्होंने 2 सितंबर की रात थाने में कथित प्रताड़ना और पुलिस कार्रवाई का पूरा घटनाक्रम बताया था। मामले को लेकर पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने भी महिला की गिरफ्तारी और न्यायालय में पेशी का मुद्दा उठाया था। बताया गया कि न्यायालय की ओर से गिरफ्तारी की वैधानिकता पर टिप्पणी किए जाने के बाद महिला को राहत मिली थी।
मारपीट के विरोध में हुआ था बड़ा आंदोलन
महिला के साथ कथित मारपीट के विरोध में मरार माली समाज ने 15 सितंबर को किरनापुर में आंदोलन किया था। आंदोलन के दौरान थाने में पथराव और तोड़फोड़ की घटना भी हुई थी। पुलिस ने इस मामले में उपलब्ध वीडियो फुटेज के आधार पर पूर्व सांसद कंकर मुंजारे, समाज के पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और अन्य लोगों सहित कई व्यक्तियों के खिलाफ बलवा, लोकसेवक के कार्य में बाधा और शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है।